मेरा जन्म जम्मू कश्मीर के कठुआ जिले में बसहौली नामक गाँव मे हुआ! मैं एक मजदूर परिवार से हूँ, जो कि छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा में जैजैपुर ब्लाक के चिस्दा गाँव के रहने वाले है!
मेरी पढ़ाई लिखाई जम्मू के सरकारी स्कूल में हुई है
पांचवी तक मई गोवेर्मेंट प्राइमरी स्कूल राजपुरा / शिव नगर जम्मू मे हुआ
इसके बाद छटवी से बारहवीं तक गोवेर्मेंट बॉयज हाई स्कूल सरवाल / रेहड़ी जो कि बाद में हायर सेकेंडरी बनगया से हुई
पढ़ाई में कुछ खास नहीं था मैं, जैसे तैसे करके पासिंग नंबर ले आता था, लेकिन दिक्कत तब शुरू हुई जब अचानक से हिंदी मध्यम से इंग्लिश मध्यम होगया अब सब कुछ सर के ऊपर से जा रहा था पहले छह महीने तक टीचर से सिर्फ मार ही खाई स्कूल में ।
इसके बाद कुछ समझ आने लगा लेकिन इस बिच भी मार खानी पड़ती थी कियु कुछ कुछ ही समज पता था मैं एक बार तो भुखार ही होगया मुझे फिर तबसे टीचर ने मुझे मरना ही छोड़ दिया।
लेकिन खुशी बात यह थी कि मैं पास हो गया था अब छटवी से सातवीं क्लास में आगया टीचर्स भी खुश थी कि मैं पास हो गया था ।
मैं जहा रहता था वहां सब बच्चे ऐसे थे जिन्हे पढने मे मज़ा नहीं आता था, अब मे भी उन्ही कि तरह हो गया था । स्कूल से आने के बाद स्कूल बैग फेक कर बाहर घूमता रहता था, इस बात मम्मी पापा बहुत मार पड़ती लेकिन मैं था बहुत ज़िद्दी जैसे तैसे बच बचा कर निकल ही जाता, हद्द तो तब हो गई जब अपने साथ मैं अपने छोटी बहनो को भी लेजाता था घूमने, नहर में नहाने जाना मुझे बहुत अच्छा लगता था लेकिन तैरना नहीं आया अभी तक मुझे।
इसके चलते मैं आठवीं में इस बार फ़ैल हो गया और मेरी पिटाई भी बहुत हुई और मेरा घर के बार जा कर खेलना भी बंद हो गया, मैं बहुत किस्मत वाला था कि में जो मांगता वो मुझे मिल जाता था घर मैं टीवी माँगा मिल गया,
अब मेरा मन पैसे कमाने करने लगा मैंने केबल टीवी कनेक्शन का काम सीखना शुरू किया और काम करना शुरू कर दिया 1000 रुपए महीना मिलता था बहुत ख़ुशी हुई कियुकि यह पार्ट टाइम काम था । एक साल बाद मैं नौवीं क्लास आ गया पर काम करना नहीं छोड़ पाया ।
यह मेरी पढ़ाई का दुश्मन बन गया और मुझे दसवीं में एडमिशन नहीं मिला कियुकि नौवीं नंबर नहीं कि दसवीं में एडमिशन मिल पाती ।
लेकिन मैंने मेहनत की और बोर्ड द्वारा प्राइवेट एग्जाम देकर पास हो गया । लेकिन काम भूत अभी सर पर नाच रहा था गयार्वी क्लास में एडमिशन लेने के बाद मेरी पढ़ाई थोड़ी अच्छी हो गई और हर टेस्ट में पास होता गया, अब मेरे गयार्वी एग्जाम आये और में पास हो गया ।
बारवी में एडमिशन हो गया मुझे पढने मज़ा आने लगा और हर क्लास अटेंड करता था सारे टेस्ट्स में भी पास होता था, लेकिन जब मेरे एग्जाम आया तो काम भूत सर पर चढ़ा था, एक्साम्स की परवा न करते हुऐ केबल टीवी का काम करने चला जाता था और में फ़ैल होगया ।
मैं पोलिटिकल साइंस और सिर्फ इंग्लिश पास कर पाया था । बाकि एजुकेशन, हिंदी, और इकोनॉमिक्स जैसे मुश्किल सब्जेक्ट्स को बिना कचिन के पास कर पाना मुश्किल ही नामुनकिन था ।
कहानी अभी बाकी !!!
कृपया मुझे फोलो करे